खाद की कालाबाजारी पर तिरहुत आयुक्त का प्रहार: कंट्रोल रूम से होगी निगरानी

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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने प्रमंडल के सभी छह जिलों के किसानों को राहत पहुँचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयुक्त कार्यालय में क्षेत्रीय कृषि निदेशक और जिला कृषि पदाधिकारियों (DAO) के साथ आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को उचित दर पर और सही समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि खाद की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की बाधा या कृत्रिम संकट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसानों की जरूरतों की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।

कालाबाजारी रोकने को कंट्रोल रूम और मॉनिटरिंग सिस्टम
आयुक्त ने उर्वरकों की कालाबाजारी पर सख्त रुख अपनाते हुए एक सुदृढ़ मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत प्रत्येक जिले में एक समर्पित नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किया जाएगा, जिसकी सीधी निगरानी जिला कृषि पदाधिकारी करेंगे। यह कंट्रोल रूम उर्वरक से संबंधित शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, जिला कृषि पदाधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट कर खाद दुकानों का औचक निरीक्षण करने, स्टॉक रजिस्टर की जांच करने और किसानों से सीधे फीडबैक लेने को कहा गया है ताकि वितरण प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सके।

जबरन नैनो यूरिया थोपने और अधिक वसूली पर कड़ाई
बैठक में किसानों की स्वायत्तता पर जोर देते हुए आयुक्त ने कहा कि उन्हें नैनो यूरिया या किसी अन्य वैकल्पिक उत्पाद को खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक चुनने के लिए स्वतंत्र हैं और किसी भी प्रकार का दबाव या अनुचित प्रलोभन स्वीकार्य नहीं होगा। साथ ही, निर्धारित सरकारी दर से अधिक मूल्य वसूलने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सभी दुकानों पर खाद की दर सूची और स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है।

सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता और निबंधन में तेजी
नेपाल से सटे सीमावर्ती जिलों—पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और सीतामढ़ी—में यूरिया की संभावित कालाबाजारी और अवैध आपूर्ति को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में भंडारण और वितरण की नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि अवैध भंडारण पर प्रभावी रोक लग सके। अंत में, आयुक्त ने कृषि क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रखंड कृषि पदाधिकारियों, समन्वयकों और किसान सलाहकारों को सक्रिय कर किसानों के निबंधन की गति तेज करें, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत लक्ष्य के साथ हर जरूरतमंद किसान तक पहुँच सके।