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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के एप्लाइड साइंसेज़ एवं ह्यूमैनिटीज विभाग द्वारा आयोजित साप्ताहिक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) “New Horizons in Applied Mathematics with Future Prospects (NHAMP-2026)” का चौथा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम के चौथे दिन अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने गणित के आधुनिक अनुप्रयोगों पर चर्चा की।
वैश्विक विशेषज्ञों का रहा जमावड़ा
दिन के पहले सत्र की शुरुआत ऑनलाइन माध्यम से यूमास एमहर्स्ट (USA) के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रांजल के व्याख्यान से हुई। उन्होंने "कंप्यूटेशनल गणित में अन्वेषण" विषय पर अपनी बात रखते हुए आधुनिक एल्गोरिदम और गणना तकनीकों की महत्ता बताई। दूसरे सत्र में आईआईटी पटना के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार वर्मा ने "गणितीय विचारों का विकास: कलन (Calculus) से आधुनिक शोध तक" विषय पर शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि कैसे कैलकुलस की बुनियादी समझ आधुनिक शोध की नींव मजबूत करती है। तीसरे सत्र में बी.आर.ए.बी.यू. बिहार के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार शुक्ला ने "अंकगणितीय कार्यों और उनके गुणक गुणों" पर विस्तृत जानकारी साझा की, जिससे संख्या सिद्धांत (Number Theory) की बारीकियों को समझने में मदद मिली।
दिन का समापन आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी की प्रो. सांत्वना मुखोपाध्याय के व्याख्यान से हुआ। उन्होंने "पाइज़ोथर्मोइलास्टिसिटी (Piezothermoelasticity)" पर गणितीय मॉडलिंग के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझाते हुए बताया कि कैसे इंजीनियरिंग और भौतिकी के क्षेत्र में गणित एक सेतु का कार्य करता है।
शोध और अकादमिक कौशल को मिलेगी नई दिशा
एमआईटी के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) एम.के. झा ने सभी विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम न केवल शिक्षकों बल्कि एम.टेक के छात्रों के लिए भी शोध कार्य में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रजनीश कुमार और सह-संयोजक अमित कुमार वर्मा ने भी अतिथियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर आयोजन सचिव प्रोफेसर अतुल गुप्ता, डॉ. शिवालिका, डॉ. शैलबाला, डॉ. सारिका, डॉ. मनोज, डॉ. राजेश्वर राय, प्रो. विपुल, प्रो. अनूप, प्रो. प्रियंका, डॉ. राजेश, डॉ.अनिल और डॉ. संतोष सहित कई गणमान्य शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित रहे। यह एफडीपी प्रतिभागियों के अकादमिक कौशल को निखारने और अंतःविषय शोध (Interdisciplinary Research) के नए रास्ते खोलने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है।
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