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न्यूज डेस्क। समस्तीपुर
शिक्षा के क्षेत्र में नित नए प्रयोग और नवाचारों को अपनाने वाले समस्तीपुर जिले ने एक बार फिर राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। बिहार के शिक्षा विभाग और एससीईआरटी (SCERT) द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय टीएलएम (शिक्षण अधिगम सामग्री) मेला 3.0 में जिले की दो मेधावी शिक्षिकाओं ने अपनी रचनात्मकता और शिक्षण कौशल से पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस प्रतियोगिता में प्राथमिक विद्यालय चकदाऊद, पटोरी की शिक्षिका अमृता राय ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति के आधार पर राज्य भर में तृतीय स्थान प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया है। वहीं, पर्यावरण थीम पर आधारित नवाचारी टीएलएम के साथ प्राथमिक विद्यालय खोरिया, विभूतिपुर की शिक्षिका प्रतीक्षा शुक्ला ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप-10 विजेताओं की सूची में अपना स्थान सुरक्षित किया।
निदेशक ने किया सम्मानित :
इस उपलब्धि की गूँज न केवल समस्तीपुर बल्कि पूरे बिहार के शिक्षा गलियारों में सुनाई दे रही है। राज्य मुख्यालय में आयोजित एक भव्य गरिमामय कार्यक्रम के दौरान इन दोनों शिक्षिकाओं को उनके अनुकरणीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान निदेशक सामान्य प्रशासन सुषमा, सपना और विभा कुमारी के हाथों प्रदान किया गया, जिन्होंने शिक्षिकाओं के कठिन परिश्रम और रचनात्मक सोच की खुले मन से सराहना की। जिले के लिए यह क्षण इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि समस्तीपुर की इन शिक्षिकाओं द्वारा तैयार की गई शिक्षण सामग्री को न केवल सराहा गया, बल्कि इसे अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
डीपीओ ने जताया हर्ष:
शिक्षिकाओं की इस ऐतिहासिक सफलता पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (एसएसए) जमालुद्दीन ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि समस्तीपुर के समस्त शिक्षा जगत के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षिकाओं ने न केवल टीएलएम निर्माण में महारत दिखाई है, बल्कि अपने नवाचार से यह भी सिद्ध कर दिया है कि सीमित संसाधनों में भी श्रेष्ठ शिक्षण संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे समर्पित शिक्षक समाज और विभाग के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत बनेंगे और उनके कार्यों से प्रभावित होकर अन्य विद्यालयों के शिक्षक भी नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।
टीएलएम निर्माण का वास्तविक उद्देश्य केवल किसी प्रतियोगिता में पदक जीतना नहीं:
अपनी इस सफलता के पीछे के मूल मंत्र को साझा करते हुए सम्मानित शिक्षिकाओं ने शिक्षा के प्रति अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया। उनका मानना है कि टीएलएम निर्माण का वास्तविक उद्देश्य केवल किसी प्रतियोगिता में पदक जीतना नहीं होता, बल्कि इसका प्राथमिक लक्ष्य कक्षा-कक्ष के भीतर सीखने की प्रक्रिया को बच्चों के लिए सहज, रोचक और प्रभावी बनाना है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि पढ़ाई को 'निपुण लक्ष्य' के अनुरूप शिक्षण सामग्रियों के माध्यम से कराया जाए, तो शिक्षा बच्चों के लिए बोझ न बनकर एक आनंददायक अनुभव में बदल जाती है। यह मंच न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का माध्यम बना, बल्कि इसने बिहार के नवाचारी शिक्षकों को अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय पटल तक ले जाने का एक नया रास्ता भी दिखाया है।
जिले की इस दोहरी सफलता से समस्तीपुर के शिक्षकों और विभागीय अधिकारियों के बीच उत्साह का माहौल व्याप्त है। शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह के सम्मानों से न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एक नई ऊर्जा का संचार भी करता है।
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