सेहत की जांच और विज्ञान का साथ: MDDM कॉलेज में छात्राओं ने लिया 'फिट बिहार' का संकल्प

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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
शहर के प्रतिष्ठित एम.डी.डी.एम. कॉलेज के डाइटेटिक्स एवं न्यूट्रिशन विभाग ने 'विश्व स्वास्थ्य दिवस' को केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक अभियान के रूप में मनाया। "सभी के लिए स्वास्थ्य, विज्ञान के साथ" थीम पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में न केवल विशेषज्ञों ने सेहत के गुर सिखाए, बल्कि कैंपस में ही छात्राओं और शिक्षकों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्राचार्य डॉ. अल्का जायसवाल, मुख्य अतिथि डॉ. पल्लवी श्रेष्ठा (सीएनएस हॉस्पिटल, पटना) और डॉ. रितु शर्मा (नेस्टिवा हॉस्पिटल) द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कैंपस में हुई जांच: बी-12 से लेकर ब्लड शुगर तक का टेस्ट :
स्वास्थ्य जागरूकता को धरातल पर उतारते हुए कॉलेज परिसर में एक विस्तृत जांच शिविर लगाया गया। इसमें छात्राओं और स्थानीय लोगों के ब्लड ग्रुप, ब्लड शुगर, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), विटामिन B-12 और विटामिन D की मुफ्त जांच की गई। एनएमसीएच पटना के डॉ. दीपक और अन्य विशेषज्ञों ने जांच के बाद प्रतिभागियों को उनकी रिपोर्ट के आधार पर डाइट चार्ट और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के व्यावहारिक परामर्श दिए। पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सुशीला सिंह की उपस्थिति ने आयोजन को अकादमिक और अनुभवी मजबूती प्रदान की।

पोस्टर और नाटक से दिया सामाजिक संदेश : 

छात्राओं ने केवल जांच ही नहीं कराई, बल्कि रचनात्मकता के जरिए गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों पर अपनी समझ भी प्रदर्शित की। पोस्टर प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से 'मानसिक स्वास्थ्य' और 'एनीमिया' जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाई गई। पोस्टर मेकिंग में सुकन्या कुमारी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, जबकि शर्वानी कुमारी और नैन्सी प्रिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।

विशेषज्ञों का मंत्र: संतुलित आहार ही सबसे बड़ी औषधि : 

अपने संबोधन में सीएनएस हॉस्पिटल की मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी श्रेष्ठा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को फास्ट फूड की जगह पारंपरिक और संतुलित आहार की ओर लौटना होगा। प्राचार्य डॉ. अल्का जायसवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक स्वस्थ छात्रा ही एक सशक्त समाज का निर्माण कर सकती है। निशी रानी के कुशल संचालन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे यह आयोजन स्वास्थ्य क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ।