सोनपुर में सजेगा 'काशी' सा दरबार: ₹680 करोड़ से बदलेगी बाबा हरिहरनाथ की सूरत

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अमित कुमार। मुजफ्फरपुर
आध्यात्मिक गौरव का नया अध्याय बिहार की धरती अब केवल इतिहास के पन्नों में ही नहीं, बल्कि आधुनिक विकास के मानचित्र पर भी अपनी भव्यता बिखेरने को तैयार है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कैबिनेट की पहली बैठक ने राज्य के विकास को एक नई दिशा दी है। इस पिटारे से जो सबसे अनमोल रत्न निकला है, वह है सोनपुर के ऐतिहासिक बाबा हरिहरनाथ मंदिर का कायाकल्प। भगवान विष्णु और शिव के मिलन स्थली के रूप में विख्यात इस पावन धाम को अब वाराणसी के 'काशी विश्वनाथ कॉरिडोर' की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। ₹680 करोड़ की भारी-भरकम राशि से बनने वाला यह कॉरिडोर न केवल श्रद्धालुओं की राह आसान करेगा, बल्कि बिहार के पर्यटन को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगा।


विरासत और आधुनिकता का संगम : 

बाबा हरिहरनाथ कॉरिडोर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का एक भव्य केंद्र बनेगा। जिस तरह काशी में गंगा की लहरों के साथ विश्वनाथ धाम की भव्यता निखरती है, ठीक उसी तरह गंडक के तट पर स्थित हरिहरनाथ क्षेत्र में श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभव होगा। चौड़ी सड़कें, भव्य प्रवेश द्वार, विश्राम गृह और आधुनिक सुविधाओं से लैस यह प्रोजेक्ट सोनपुर मेले की रौनक में चार चांद लगा देगा। इसी कड़ी में मुंगेर के तारापुर को भी धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए 15 एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को सौंपी गई है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।

शहरीकरण की नई क्रांति: 11 सैटेलाइट टाउनशिप : 

बिहार अब बेतरतीब शहरीकरण के बजाय 'स्मार्ट और नियोजित' विकास की ओर कदम बढ़ा चुका है। सरकार ने गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 11 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। खास बात यह है कि इन क्षेत्रों में मास्टर प्लान लागू होने तक जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण पर रोक लगा दी गई है। यह कड़ा फैसला इसलिए लिया गया है ताकि भविष्य के ये शहर जाम, प्रदूषण और अव्यवस्था से मुक्त हों और नए आर्थिक केंद्रों के रूप में उभर सकें।

आधी आबादी को रफ्तार और सुरक्षा कवच :

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बिहार पुलिस को हाई-टेक बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। महिला पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनकी पहुंच को त्वरित बनाने के लिए सरकार ने 1500 स्कूटी खरीदने की मंजूरी दी है। ₹18.75 करोड़ का यह निवेश महिला पुलिस बल को 'ऑन-ड्यूटी' अधिक सक्रिय और आत्मविश्वास से लबरेज करेगा। वहीं, पूरे पुलिस बेड़े की मजबूती के लिए 3200 नई मोटरसाइकिलें भी खरीदी जाएंगी। सुरक्षा तंत्र को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए पटना में ₹172 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक पुलिस डेटा सेंटर और ERSS भवन का निर्माण किया जाएगा, जिससे अपराध नियंत्रण में तकनीक का बोलबाला होगा।

कौशल विकास से संवरेगा युवाओं का भविष्य : 

शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर भी कैबिनेट ने बड़े दांव खेले हैं। राज्य के 75 सरकारी आईटीआई (ITI) संस्थानों को ₹3615 करोड़ की लागत से आधुनिक कौशल प्रशिक्षण केंद्रों में बदला जाएगा। यह कदम बिहार के युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार करेगा। वहीं, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में IIT पटना को एक नई शक्ति मिली है। यहाँ ₹344 करोड़ से अधिक की लागत से रिसर्च पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर बनाए जाएंगे, जिससे बिहार के युवा अब अपने स्टार्टअप और नवाचार (Innovation) के सपनों को अपनी ही धरती पर उड़ान दे सकेंगे।

बुजुर्गों को सम्मान और कर्मचारियों को राहत : 

सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए 'बिहार निबंधन नियमावली 2026' को हरी झंडी दी गई है। इसमें 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाओं का प्रावधान किया गया है, ताकि उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने एक मानवीय पहल करते हुए निलंबित चल रहे 224 राजस्व कर्मचारियों का निलंबन रद्द कर उन्हें बड़ी राहत दी है। ये फैसले बताते हैं कि सरकार विकास के साथ-साथ न्याय और संवेदनशीलता के मार्ग पर भी अग्रसर है।