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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
जिले में गर्मी की दस्तक के साथ ही एईएस/जेई (चमकी बुखार) की रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। 'शून्य मृत्यु दर' (Zero Mortality) के कड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए शुक्रवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक श्री अमित कुमार पांडेय ने जिलाधिकारी की उपस्थिति में तैयारियों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा की। इस दौरान जिला स्वास्थ्य समिति ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए संसाधनों की उपलब्धता, दवाओं के स्टॉक और जमीनी स्तर पर चल रहे जागरूकता अभियानों का पूरा खाका पेश किया।
कार्यपालक निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मरीजों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रणनीति के मुख्य बिंदु :
जनजागरूकता और 'संध्या चौपाल':
ग्रामीण इलाकों में जागरूकता के लिए हर शनिवार पंचायतों में 'संध्या चौपाल' का आयोजन किया जाएगा। घर-घर संपर्क अभियान के तहत आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अभिभावकों को बच्चों के खान-पान (रात में भूखे न सुलाने) और साफ-सफाई के प्रति जागरूक करेंगी।
प्रशिक्षण और क्षमता संवर्द्धन :
* एईएस से निपटने के लिए डॉक्टरों, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और आईसीडीएस वर्कर्स का चरणबद्ध प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि प्रारंभिक लक्षणों की तुरंत पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके और गंभीर मरीजों को बिना देरी किए रेफर किया जा सके।
दवाओं का पर्याप्त भंडारण :
* प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) से लेकर सदर अस्पताल तक ग्लूकोज, एंटीबायोटिक, ऑक्सीजन और जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। अस्पतालों में बेड, आईसीयू और एम्बुलेंस व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।
'दर्पण एप' से निगरानी :
* सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिदिन उपस्थिति की मॉनिटरिंग 'दर्पण एप' के जरिए की जाएगी, ताकि सेवा में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
पंचायत स्तर पर वाहन टैगिंग :
* आपातकालीन स्थिति में बच्चों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए हर पंचायत में एम्बुलेंस/वाहनों की टैगिंग की गई है। वाहन मालिकों को समय पर भुगतान का भी निर्देश दिया गया है ताकि परिवहन व्यवस्था निर्बाध रहे।
विभागीय समन्वय :
* इस अभियान में जीविका दीदियों, शिक्षा विभाग, पंचायती राज और नगर निकायों को भी शामिल किया गया है। स्कूलों में चेतना सत्र के दौरान बच्चों को एईएस से बचाव की जानकारी दी जाएगी।
* एईएस (चमकी बुखार) के मुख्य लक्षण:
तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी या अचेत होना, शरीर में ऐंठन (दौरा पड़ना), अत्यधिक कमजोरी और मानसिक भ्रम।
बचाव के आसान उपाय :
* बच्चों को रात में खाली पेट बिल्कुल न सुलाएं।
* सुबह उठते ही बच्चों को कुछ मीठा या पौष्टिक आहार जरूर दें।
* तेज बुखार या बेहोशी दिखने पर घरेलू उपचार में समय न गंवाएं, तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
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