समस्तीपुर के लाल का कमाल: UPSC में पहले ही प्रयास में हासिल की 102वीं रैंक

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न्यूज डेस्क। समस्तीपुर (बिहार)
कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य साफ, तो सफलता कदम चूमती है। बिहार के समस्तीपुर जिले के महदीनगर प्रखंड (राजा जान) के निवासी अभिषेक चौहान ने इस बात को सच कर दिखाया है। अभिषेक ने देश की सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास (First Attempt) में 102वीं रैंक हासिल कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है।


पारिवारिक पृष्ठभूमि और शैक्षणिक सफर (Academic Journey)
अभिषेक एक शिक्षित और संस्कारी पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता प्रोफेसर अभय कुमार सिंह, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्राध्यापक हैं और वर्तमान में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी (NOU) में रजिस्ट्रार के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे पूर्व प्रोफेसर सिंह बीआर बिहार विश्वविद्यालय में अध्यक्ष छात्र कल्याण और रामेश्वर सिंह कॉलेज व एलएनटी कॉलेज में बतौर प्राचार्य सेवा दे चुके हैं। अभिषेक की माता अनुराधा राजपूत एक कुशल गृहिणी हैं।

अभिषेक की शिक्षा की नींव काफी मजबूत रही है:
स्कूली शिक्षा: उन्होंने अपनी 10वीं की पढ़ाई आरके मिशन, पुरुलिया (RK Mission Purulia) से की। इसके बाद 12वीं की शिक्षा गुरु वशिष्ठ स्कूल, हाजीपुर से पूरी की।
उच्च शिक्षा: अभिषेक ने प्रतिष्ठित IIT में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने जियोलॉजी (Geology) में इंटीग्रेटेड एम.टेक की डिग्री हासिल की।

कॉर्पोरेट की चमक छोड़, घर से शुरू किया संघर्ष
आईआईटी से डिग्री लेने के बाद अभिषेक का चयन एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में हुआ। कुछ समय तक वहां नौकरी करने के बाद, उन्होंने महसूस किया कि उनका असली लक्ष्य देश की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनकर समाज की सेवा करना है। उन्होंने एक साहसी निर्णय लिया और मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर पूर्णतः यूपीएससी की तैयारी में जुट गए।
सेल्फ स्टडी और स्वाध्याय पर अटूट भरोसा
आज के दौर में जहाँ छात्र बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों के पीछे भागते हैं, अभिषेक ने 'स्वाध्याय' (Self-study) को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने हाजीपुर में ही रहकर कड़ी मेहनत की। हालाँकि, इंटरव्यू के पड़ाव पर उन्होंने कुछ अनुभवी विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया, लेकिन मुख्य तैयारी का आधार उनकी अपनी लगन और मेहनत ही रही।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
अभिषेक की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी या छोटे शहरों से होने का बहाना बनाते हैं। पहले ही प्रयास में टॉप रैंक हासिल करना उनकी एकाग्रता और सही रणनीति का परिणाम है। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे समस्तीपुर में खुशी की लहर है और उनके पैतृक गांव राजा जान में जश्न का माहौल है।
"अभिषेक की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह उन सभी माता-पिता और छात्रों के लिए एक संदेश है जो कड़ी मेहनत और ईमानदारी में विश्वास रखते हैं।"