मुजफ्फरपुर में नवविवाहिता की हत्या, बबली को मारकर घर से फरार हो गये ससुरालवाले
विशेष संवाददाता | मुजफ्फरपुरशादी का वो लाल जोड़ा, वो शहनाइयां और वो वादे... सब कुछ महज़ एक छलावा साबित हुआ। मुजफ्फरपुर के पानापुर थाना क्षेत्र के रोशनपुर पानापुर गांव से एक ऐसी खबर आई है जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। महज़ कुछ महीने पहले जिस घर में बबली कुमारी (29) दुल्हन बनकर आई थी, उसी घर से आज उसकी संदिग्ध लाश निकली। यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि दहेज रूपी दानव द्वारा की गई एक सोची-समझी हत्या की पुख्ता आशंका है।

बड़ा सवाल, हत्या नहीं तो घर छोड़कर क्यों भागे सास-ससुर-ननद :
मृतका के परिजनों का आरोप सीधा और दिल दहला देने वाला है। उनका कहना है कि शादी के बाद से ही बबली को ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। जिस मोबाइल कैमरे से कभी उसकी शादी की खुशियां कैद की गई थीं (संलग्न तस्वीर), आज उसी कैमरे की तस्वीरें उसकी बेबसी और उसके साथ हुए अन्याय की गवाही दे रही हैं। परिजनों का साफ कहना है कि बबली पिछले कई दिनों से बेहद परेशान थी और उन्हें पूरा यकीन है कि उसकी हत्या कर दी गई है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पति को हिरासत में ले लिया है, लेकिन कहानी का सबसे स्याह पहलू यह है कि बबली की सास, ससुर और ननद, जिन पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप हैं, घर छोड़कर फरार हैं। उनका इस तरह भाग जाना कई सवाल खड़े करता है और हत्या की आशंका को और मजबूत करता है।
अक्सर मिलती थी प्रताड़ना, सहती रही बबली :
बबली का गुनाह सिर्फ इतना था कि वह एक ऐसे घर में ब्याही गई जहाँ रिश्तों से ज्यादा अहमियत लालच की थी। आज उस घर में सन्नाटा है, लेकिन बबली के परिजनों की चीखें और न्याय की मांग गूँज रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेज दिया है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। लेकिन क्या पोस्टमार्टम की रिपोर्ट उस दर्द को बयां कर पाएगी जो बबली ने सहा? क्या कानून उस लालच को सजा दे पाएगा जिसने एक हँसती-खेलती जिंदगी को खामोश कर दिया?
इनसाइड : ओ रे निष्ठुर दुनिया! मेरा क्या कसूर था? 11 महीने के मासूम की खामोश चीख, जिसे अब कभी नहीं मिलेगा 'मां' का आंचल
वह अभी ठीक से चलना भी नहीं सीखा था। उसकी जुबान से अभी 'मां' शब्द पूरी तरह फूटा भी नहीं था। लेकिन कुदरत और इंसानी हैवानियत ने मिलकर 11 महीने के उस मासूम के सिर से वो साया छीन लिया, जो दुनिया में सबसे अनमोल होता है। हाँ, हम बात कर रहे हैं बबली के उस 11 महीने के बेटे की, जिसकी दुनिया उसकी मां की गोद में सिमटी थी। जरा सोचिए, उस बच्चे का क्या कसूर था? वह तो बेखबर था उस नफरत और लालच से जो उसके अपने ही घर में पल रही थी। वह बेखबर था कि जिस मां की लोरी सुनकर वह सोता था, वह मां अब कभी नहीं जागेगी। जब घर में कोहराम मचा था, जब पुलिस आई थी, जब उसकी मां की बेजान देह को ले जाया जा रहा था, तब वह मासूम शायद अपनी मां को ढूंढ रहा होगा, शायद भूख से रो रहा होगा, यह सोचकर कि उसकी मां अभी आएगी और उसे गले लगा लेगी। लेकिन अब उसे गले लगाने वाली, उसकी हर तकलीफ को उसके बिन बोले भांप लेने वाली वो 'मां' कभी नहीं आएगी। अब उस बच्चे के लिए 'मां' शब्द महज़ एक याद बनकर रह जाएगा। उसकी परवरिश होगी, वह बड़ा होगा, लेकिन उसके जीवन में वो खालीपन कभी नहीं भरेगा जो उसकी मां के जाने से पैदा हुआ है।
कौन देगा उसे वो ममता? कौन सुलाएगा उसे...
11 महीने के इस मासूम को कौन देगा उसे वो ममता? कौन सुलाएगा उसे लोरी गाकर? कौन उसकी तोतली जुबान से 'मां' शब्द सुनने के लिए तरसेगा? यह समाज, यह कानून, यह रस्में... सब धरी की धरी रह जाती हैं जब एक मासूम के सिर से मां का आंचल हट जाता है। बबली की मौत सिर्फ एक महिला की मौत नहीं है, यह उस 11 महीने के बच्चे के बचपन की, उसकी मासूमियत की और उसके भविष्य की भी हत्या है। ओ रे निष्ठुर दुनिया! इस मासूम का क्या कसूर था, जो उसे इतनी बड़ी सजा मिली?
कौन देगा उसे वो ममता? कौन सुलाएगा उसे...







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