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न्यूज डेस्क। समस्तीपुर
कहते हैं कि अगर लक्ष्य निर्धारित हो और मेहनत अटूट, तो सफलता की राह में कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। इस बात को सच कर दिखाया है उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, पांड़ के मेधावी छात्र आदित्य प्रकाश अमन ने। विज्ञान संकाय के इस स्टेट टॉपर ने उन विषयों में भी 98 और 89 जैसे शानदार अंक प्राप्त किए हैं, जिनके शिक्षक स्कूल में उपलब्ध ही नहीं थे। यह सफलता आदित्य के जोश, जज्बे और जुनून का जीवंत प्रमाण है।
तीन कमरों में सिमटा भविष्य, संसाधनों का भारी अभाव :
विडंबना यह है कि उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, पांड़ अपनी स्थापना के बाद से ही बुनियादी ढांचे के लिए संघर्ष कर रहा है। वर्तमान में यह विद्यालय मात्र तीन कमरों में संचालित हो रहा है। यहाँ न तो पर्याप्त कक्षाएं हैं और न ही संसाधनों की उपलब्धता। विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, 11वीं और 12वीं की कक्षाएं चलाने के लिए भी जगह का अभाव है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल में गणित और रसायन शास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक तक नियुक्त नहीं हैं।
निजी कोचिंग का सहारा और 'प्रैक्टिकल' का खेल :
संसाधनों के अभाव में यहाँ के छात्र निजी कोचिंग संस्थानों के भरोसे अपनी पढ़ाई पूरी करने को मजबूर हैं। जहाँ एक ओर आदित्य जैसे छात्रों ने अपनी प्रतिभा से जिले का मान बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर बिहार बोर्ड की 'प्रैक्टिकल' परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। गणेश कुमार जैसे पिछले विवादों की छाया में, प्रैक्टिकल परीक्षा में नंबरों की "बंदरबांट" की चर्चाएँ गर्म हैं।
आदित्य को फिजिक्स में 29 और जीव विज्ञान व रसायन शास्त्र में 30-30 अंक मिले हैं। सवाल यह उठता है कि जिस विद्यालय में विषयवार कक्ष और प्रयोगशाला (Lab) तक नहीं है, वहाँ प्रायोगिक परीक्षा की औपचारिकता कैसे पूरी की गई? यह जिला शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।
मेहनत और जज्बे को सलाम :
तमाम अव्यवस्थाओं और अभावों के बीच आदित्य की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती। आदित्य ने प्रतिकूल परिस्थितियों को अपनी ढाल बनाया और आज वह पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बनकर उभरे हैं।
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