"मंच पर मरना आसान है, लेकिन मंच से उतरकर रोज थोड़ा-थोड़ा मरना सबसे बड़ी त्रासदी" 

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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
जिला स्कूल के मैदान में शुक्रवार की शाम जब रोशनी मद्धम हुई और मंच पर 'नट बख्खो' के पात्र उभरे, तो दर्शक दीर्घा में सन्नाटा पसर गया। आकृति रंग संस्थान द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य मेला के पहले दिन कलाकारों ने अभिनय की वह पराकाष्ठा छुई, जिसने वैभव से पतन की ढलान तक के सफर को दर्शकों की आंखों में आंसू बनकर उतार दिया। नाटक महज एक मंचन नहीं, बल्कि रंगमंच की उस क्रूर हकीकत का दस्तावेज बन गया, जहां एक कलाकार की पहचान तालियों के शोर से शुरू होकर स्मृतियों के वीराने में दफन हो जाती है।
डॉ. सुनील फेकानिया के लेखन और निर्देशन में सजी यह प्रस्तुति एक प्रख्यात अभिनेता के स्वाभिमान और उसकी विस्मृति के बीच के द्वंद्व को उकेरती है। कहानी उस वक्त की है जब उम्र का तकाजा एक चमकते सितारे के करियर पर ग्रहण लगा देता है और उसका वफादार प्रॉम्प्टर उसे शब्द उधार देकर जीवन की मुख्यधारा में बनाए रखने की कोशिश करता है। मंच पर गूंजता यह संवाद— "मंच पर मरना आसान है, लेकिन मंच से उतरकर रोज थोड़ा-थोड़ा मरना सबसे बड़ी त्रासदी है"—हर किसी के दिल को झकझोर गया।


फैज की कालजयी नज्मों ने प्रदान की ऊंचाइयां : 
इस मार्मिक रंगकथा को फैज अहमद फैज की कालजयी नज्मों ने एक अलग ही ऊंचाई प्रदान की। "मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग" और "पास रहो कि बहुत रात जा चुकी है" जैसी पंक्तियां जब पार्श्व संगीत के साथ घुलीं, तो वे पात्रों की आत्मा की आवाज बन गईं। महताब की भूमिका में शेखर सुमन और निकेत के रूप में विवेक कुमार ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या एक कलाकार की नियति केवल तालियां हैं, या उस सन्नाटे की भी कोई जिम्मेदारी है जो पर्दा गिरने के बाद पसर जाता है।

दूसरे दिन होगा पेंटिंग वर्कशॉप : 
समारोह का विधिवत शुभारंभ वरीय शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण शाह, डॉ. प्रवीण चंद्रा, पूर्व महाप्रबंधक अरुण कुमार, पूनम कुमारी और संयोजक डॉ. संजय सुमन सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। मंच संचालन सत्यम कुमार सिंह ने किया, जबकि यशवंत पराशर ने महोत्सव की रूपरेखा साझा की। कार्यक्रम के प्रारंभ में दिवंगत रंगकर्मी रॉबिन और विजय मित्र को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को पेंटिंग प्रदर्शनी और वर्कशॉप का आयोजन होगा, जिसमें पद्मश्री निर्मला देवी और अभिनेता कुशाग्र नंदा छात्रों को कला के गुर सिखाएंगे। शाम को उदयपुर की 'रंगमस्ताने' टीम द्वारा 'महारथी' नाटक का मंचन किया जाएगा।