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न्यूज डेस्क।(रोसड़ा) समस्तीपुर
नियति का क्रूर खेल देखिए, जो परिवार कल तक दिल्ली वापसी की टिकट जेब में लिए खुश था, आज उस घर से एक साथ तीन अर्थियां निकलने की तैयारी हो रही है। समस्तीपुर जिले के शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत बोरज गांव में सोमवार की दोपहर करेह नदी के बरियाही घाट पर एक ऐसा वज्रपात हुआ, जिसने पूरे इलाके को सुन्न कर दिया है। नदी में नहाने के दौरान सुदर्शन झा के तीन सगे पुत्रों—आदित्य (17), हर्ष (15) और कार्तिक (13) की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।
पिता की आंखों के सामने डूबा कलेजे का टुकड़ा :
दिल दहला देने वाली इस घटना के वक्त पीड़ित पिता सुदर्शन झा खुद बच्चों के साथ नदी पर मौजूद थे। बताया जा रहा है कि नहाने के दौरान सबसे बड़ा पुत्र आदित्य गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे बचाने के लिए मंझला भाई हर्ष और छोटा भाई कार्तिक एक-एक कर आगे बढ़े, लेकिन नदी की तेज धारा और गहराई ने तीनों को अपनी आगोश में ले लिया। बेबस पिता ने शोर मचाते हुए गांव की ओर दौड़ लगाई, लेकिन जब तक ग्रामीण और मल्लाह मौके पर पहुँचे, तीनों भाई लहरों में ओझल हो चुके थे।
दिल्ली जाने की थी तैयारी, अब पसरा सन्नाटा :
मृतक बच्चों के पिता सुदर्शन झा दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड का काम करते हैं। वे बीते 23 मार्च को पूरे परिवार के साथ रामनवमी का पर्व मनाने अपने पैतृक गांव बोरज आए थे। मंगलवार को उन्हें वापस दिल्ली लौटना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज जहाँ घर में पैकिंग की हलचल होनी चाहिए थी, वहां मां आशा देवी के करुण क्रंदन से पत्थर का भी दिल पसीज रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक कार्रवाई :
हादसे की खबर मिलते ही शिवाजीनगर थानाध्यक्ष रविंद्र कुमार, प्रभारी अंचलाधिकारी मनीष कुमार और वीडियो आलोक कुमार सिंह दल-बल के साथ बरियाही घाट पहुंचे। स्थानीय मल्लाहों और गोताखोरों की मदद से घंटों चले सर्च ऑपरेशन के बाद तीनों भाइयों के शवों को बाहर निकाला गया। सबसे पहले आदित्य, फिर कार्तिक और शाम करीब 5 बजे हर्ष का शव बरामद हुआ। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मुआवजे का आश्वासन :
प्रभारी अंचलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि घटना अत्यंत दुखद है। प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आपदा प्रबंधन विभाग के तहत मिलने वाली सहायता राशि (प्रति मृतक 4 लाख रुपये) पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया है।
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