लाखों छात्रों के डेटा में 'अटक' सकती है सरकारी योजनाओं की राशि, विभाग ने कसी कमर

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न्यूज डेस्क। बिहार
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 के तहत सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले हज़ारों छात्रों के डेटा में अभी भी त्रुटियां मौजूद हैं। हालांकि शिक्षा विभाग डेटा सुधार की प्रक्रिया में तेजी से जुटा है, लेकिन राज्य स्तर पर अभी भी एक बड़ा आंकड़ा अधूरा है, जो चिंता का विषय बना हुआ है।
डेटा सुधार की वर्तमान स्थिति एक नजर में
राज्य स्तर पर आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और वर्तमान सत्र 2025-26 के दौरान लाखों छात्रों के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गई थीं।
विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार:
विवरण (सत्र/वित्तीय वर्ष)
कुल त्रुटिपूर्ण डेटा
अब तक हुआ सुधार लंबित डेटा
शैक्षणिक सत्र 2025-26
18,95,270
15,49,833
3,45,437
वित्तीय वर्ष 2024-25
21,97,873
19,63,938


75% उपस्थिति अनिवार्य, डेटा सुधार में देरी पड़ सकती है भारी :
समग्र शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) जमालुद्दीन ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए जिले के सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिन पात्र लाभुकों के डेटा में त्रुटियां हैं, उनका निराकरण अविलंब किया जाए।
विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि सरकार की डीबीटी (DBT) योजनाओं का लाभ सीधे छात्रों के खातों में पहुंचे। लेकिन इसके लिए दो शर्तें अनिवार्य हैं:
1. छात्र की स्कूल में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति होनी चाहिए।
2. छात्र का डेटा (आधार, बैंक खाता, नाम आदि) पूरी तरह त्रुटिहीन होना चाहिए।

प्रधानाध्यापकों को अंतिम चेतावनी : 
डेटा सुधार की धीमी गति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को जवाबदेह ठहराया है। यदि समय रहते डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं किया जाता है, तो साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की राशि रुक सकती है। अभिभावकों से भी अपील की जा रही है कि वे बैंक खाते और आधार से जुड़ी जानकारी स्कूल में सही-सही उपलब्ध कराएं।

"हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल आने वाला कोई भी पात्र विद्यार्थी अपनी उपस्थिति पूरी होने के बावजूद केवल कागजी गड़बड़ी के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।"
जमालुद्दीन, DPO (समग्र शिक्षा अभियान)