भारतीय वाचिक परम्परा के आधुनिक प्रतिनिधि थे नामवर सिंह : प्रो. त्रिपाठी

EducationMy City
न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
स्थानीय महंथ दर्शन दास महिला महाविद्यालय (एमडीडीएम) के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग और प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), मुजफ्फरपुर के संयुक्त तत्वावधान में प्रख्यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह के जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में एक दिवसीय विचार-गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय 'नामवर सिंह की आलोचना-दृष्टि' रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. आशा सिंह यादव ने, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नूतन कुमारी ने और प्रबंधन डॉ. राम दुलार सहनी ने किया। इस अवसर पर जिले के कई गणमान्य साहित्यकार, प्राध्यापक और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

प्रतिगामी शक्तियों के आगे कभी नहीं झुके नामवर जी: प्रो. त्रिपाठी : 

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी के प्रो. आशीष त्रिपाठी ने डॉ. नामवर सिंह को 'तनी हुई रीढ़' वाला व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि वे प्रतिगामी शक्तियों के सामने कभी नतमस्तक नहीं हुए। उन्होंने जोर देकर कहा कि नामवर जी भारतीय वाचिक परंपरा के आधुनिक ध्वजवाहक थे, जो हमेशा 'वाद-विवाद-संवाद' में विश्वास रखते थे। उनके व्यक्तित्व में ज्ञान के प्रति अपार विनम्रता और सत्ता के प्रति बेबाकी का अद्भुत संतुलन था।


साहित्य को व्यवहार में उतारना जरूरी: नथमल शर्मा : 
कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य प्रो.अलका जायसवाल के स्वागत संबोधन से हुई। उद्घाटन वक्तव्य में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार नथमल शर्मा ने कहा कि साहित्य केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे आत्मसात कर व्यवहार में उतारने के लिए है। वहीं, एमएमटीटीसी बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो.सतीश कुमार राय ने नामवर जी के लेखन की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला। आलोचना में सृजनात्मकता का संगम विशिष्ट वक्ता प्रो. सुनीता गुप्ता ने नामवर जी की आलोचना के गहन पक्षों को रेखांकित किया, जबकि प्रो. रमेश गुप्ता ने उन्हें एक संवेदनशील और सहृदय आलोचक बताया। अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. पूनम सिंह ने नामवर जी के साथ अपने संस्मरण साझा करते हुए उन्हें नई पीढ़ी का मार्गदर्शक और 'पीढ़ियों का निर्माणक' बताया।