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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
विज्ञान और आयुर्वेद के संगम से बिहार के एक प्रख्यात वैज्ञानिक ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में वैश्विक मिसाल पेश की है। बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त विज्ञान संकाय अध्यक्ष प्रो. मनेन्द्र कुमार द्वारा विकसित "नीम-तुलसी आधारित एंटीमाइक्रोबियल स्वास्थ्य उपकरण" को भारत सरकार ने मान्यता देते हुए 27 मार्च को उपयोगिता पेटेंट (Utility Patent) के रूप में प्रकाशित किया है।
यह आविष्कार घरेलू और सार्वजनिक स्थलों पर इनडोर प्रदूषण और रोगाणुओं (Bacteria, Virus, Fungus) से लड़ने के लिए एक पूरी तरह से प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प प्रदान करता है। प्रो. मनेन्द्र कुमार के इस पेटेंट के प्रकाशन से यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान (Traditional Knowledge) को यदि सही वैज्ञानिक दिशा दी जाए, तो यह आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सबसे सटीक और सुरक्षित समाधान ब
न सकता है।
क्या है इस तकनीक की खासियत?
प्रो. मनेन्द्र कुमार द्वारा विकसित यह उपकरण नीम और तुलसी के मानकीकृत अर्क (Bio-active Extracts) पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'कंट्रोल्ड-रिलीज़ प्रणाली' है, जो वातावरण के तापमान और कार्बन डाइऑक्साइड के संकेतों को समझकर सक्रिय तत्वों को धीरे-धीरे हवा में प्रसारित करती है। यह पूरी तरह से बायो-डिग्रेडेबल (जैव-अपघटनीय) सामग्री से बना है, जिससे इंसानों और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचता।
इनडोर प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति :
यह उपकरण अस्पतालों, स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक परिवहन जैसे बंद स्थानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। जहाँ आजकल रासायनिक कीटाणुनाशक और एरोसोल का अत्यधिक प्रयोग स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं यह तकनीक प्राकृतिक तरीके से संक्रमण के जोखिम को कम करती है और श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।
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