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न्यूज डेस्क। समस्तीपुर
जिले के शैक्षणिक परिदृश्य में तकनीकी शिक्षा को मजबूती देने और कंप्यूटर शिक्षकों की समस्याओं के समाधान हेतु आज एक महत्वपूर्ण पहल की गई। 'बिहार कंप्यूटर साइंस वेलफेयर एसोसिएशन' के बैनर तले स्थानीय आर.एस.बी. (R.S.B.) स्कूल, समस्तीपुर में जिले भर के +2 कंप्यूटर विज्ञान शिक्षकों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में न केवल संगठन की भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई, बल्कि शिक्षकों ने अपनी सेवा शर्तों और गरिमा से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
संगठन का विस्तार और नई कार्यकारिणी का हुआ गठन
बैठक की शुरुआत संगठन की मजबूती और एकजुटता के संकल्प के साथ हुई। सर्वसम्मति से जिला कार्यकारिणी का विधिवत गठन और निर्वाचन संपन्न कराया गया। कमल नारायण कमलेश जिलाध्यक्ष मनोनीत किये गये। चंद्रमणि को जिला सचिव, अमरजीत कुमार गौरव को कोषाध्यक्ष बनाया गया। कार्यकारिणी में राधा कुमारी, गीता कुमारी, विश्वदेश्वरी दास, विशाल कुमार, धीरज कुमार, नवीन कुमार, अमित कुमार, मनीष कुमार, विंदेश्वरी और विनय कुमार जैसे सक्रिय सदस्यों को शामिल किया गया। वहीं मार्गदर्शक मंडल में रामेश्वर चौधरी, रंजीत कुमार, धर्मनाथ शर्मा, सुधीर कुमार, सुमित कुमार और शिवचंद्र पांडेय का नाम शामिल है। ये आने वाले समय में जिले के कंप्यूटर शिक्षकों की आवाज को बुलंद करेंगे।
शिक्षण कार्य में बाधा बन रहे गैर-शैक्षणिक कार्य
बैठक के दौरान सबसे ज्वलंत मुद्दा कंप्यूटर शिक्षकों पर थोपे जाने वाले गैर-शैक्षणिक कार्यों का रहा। उपस्थित शिक्षकों ने साझा किया कि कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों द्वारा उन्हें बार-बार उन कार्यों में लगा दिया जाता है जिनका शिक्षण से सीधा संबंध नहीं होता। इससे न केवल उनके विषय की पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि छात्रों को मिलने वाली तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। सभी सदस्यों ने एक सुर में निर्णय लिया कि वे अब केवल अपने विषय और छात्रों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने मांग की कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि कंप्यूटर शिक्षकों से कोई भी गैर-शैक्षणिक कार्य न लिया जाए।
मान-सम्मान और समान अधिकार की मांग
बैठक में शिक्षकों ने एक और महत्वपूर्ण भावनात्मक और पेशेवर मुद्दा उठाया, जो उनके 'सम्मान' से जुड़ा है। शिक्षकों का कहना था कि डिजिटल युग में कंप्यूटर एक अनिवार्य विषय है, फिर भी कंप्यूटर साइंस शिक्षकों को अक्सर अन्य शिक्षकों की तुलना में वह सम्मान और कार्य संस्कृति नहीं मिल पाती जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों के मनोबल को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें अन्य संकायों के शिक्षकों के समान ही सम्मानजनक दृष्टिकोण से देखा जाए। बैठक के समापन पर सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपनी इन मांगों को उच्चाधिकारियों और सरकार के सक्षम पटल तक पहुँचाने का संकल्प लिया। शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि विभाग उनकी समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा ताकि वे बिना किसी दबाव के छात्रों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार कर सकें।
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