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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
अपनी खास भौगोलिक पहचान और लीची की मिठास के लिए मशहूर मुजफ्फरपुर अब एक नए सांस्कृतिक बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। लक्ष्मी चौक स्थित MIT इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रांगण में 7, 8 और 9 अप्रैल 2026 को होने वाला तीन दिवसीय इंटर कॉलेज फेस्ट इस बार अपनी कलात्मक थीम 'लीचीपुरम' को लेकर चर्चा के केंद्र में है। यह आयोजन केवल युवाओं की रचनात्मकता का मंच नहीं है, बल्कि पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता द्वारा संचालित 'लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान' का एक ऐसा पड़ाव है, जो विलुप्त होती पहचान और पर्यावरण के प्रति गंभीर विमर्श खड़ा करता है।
तैयारियों से बदला परिसर का माहौल :
इस फेस्ट की तैयारियों ने परिसर के माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। कॉलेज के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रो. आशीष कुमार के समन्वय में पूरे कैंपस को एक ओपन-एयर आर्ट गैलरी की तरह विकसित किया जा रहा है, जहाँ पेड़ों को ही कैनवास बना दिया गया है। इन पेड़ों पर उकेरी जा रही कलाकृतियाँ न केवल देखने में मंत्रमुग्ध करती हैं, बल्कि प्रकृति के साथ मनुष्य के गहरे जुड़ाव को भी परिभाषित करती हैं। समर्पण की कहानी यहाँ के कार्यस्थलों पर साफ देखी जा सकती है, जहां नॉर्थ बिहार इंस्टिट्यूट ऑफ फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट के निर्देशक आनंद कुमार के मार्गदर्शन में विनीता, श्वेता, राजलक्ष्मी, उदित, निखिल, सुशांत, आराध्या, अंशु प्रिया और मनोरंजन जैसे युवा कलाकार रात के अंधेरे में भी मोबाइल की टॉर्च जलाकर कला साधना में लीन हैं।
युवा पीढ़ी का संस्कृति से जुड़ना जरूरी :
अभियान के संस्थापक सुरेश गुप्ता का मानना है कि जब तक युवा पीढ़ी अपनी मिट्टी और संस्कृति से नहीं जुड़ेगी, तब तक संरक्षण की बातें अधूरी हैं। उनका संदेश "लीची बचे, पहचान बचे" इस पूरे आयोजन की आत्मा है। यह महोत्सव 7 अप्रैल को दोपहर 3:00 बजे अपने भव्य उद्घाटन के साथ शुरू होगा। आयोजकों ने इस अनूठी पहल को व्यापक पहचान दिलाने के लिए मीडिया और समाज के प्रबुद्ध जनों से सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया है, ताकि मुजफ्फरपुर की यह 'सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मिठास' दूर-दूर तक अपनी महक फैला सके।
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