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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
शिक्षा की आड़ में चल रहे संगठित 'व्यापार' और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ तिरहुत प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने अब आर-पार की जंग छेड़ दी है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी विद्यालयों द्वारा यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकों के नाम पर की जा रही अवैध वसूली और खास दुकानों से खरीदारी के दबाव पर कमिश्नर ने मंगलवार को 'सर्जिकल स्ट्राइक' वाले तेवर दिखाए। आयुक्त कार्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि बच्चों और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या स्कूलों की गुंडागर्दी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नियमों की धज्जियां उड़ा रहे स्कूलों को अंतिम चेतावनी :
आयुक्त ने इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्कूलों द्वारा अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही महंगे दाम पर सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करना न केवल अनैतिक है, बल्कि पूर्णतः अव्यवहारिक और नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यालय के पास यह कानूनी अधिकार नहीं है कि वह अभिभावक की खरीदारी की स्वतंत्रता का हनन करे। उन्होंने कहा, "अभिभावक अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार किसी भी दुकान से सामान खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं और स्कूलों का दबाव डालना पूरी तरह प्रतिबंधित है।"
कंट्रोल रूम से होगी सीधी निगरानी, अधिकारियों की जवाबदेही तय :
समस्या के प्रभावी समाधान के लिए आयुक्त ने प्रमंडल के सभी जिलाधिकारियों (DM) को 'वॉर मोड' में काम करने का निर्देश दिया है। इसके तहत अब प्रत्येक जिले में एक समर्पित 'कंट्रोल रूम' स्थापित किया जाएगा, जो सीधे जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के पर्यवेक्षण में कार्य करेगा। इस कंट्रोल रूम का नंबर सार्वजनिक किया जाएगा ताकि पीड़ित अभिभावक अपनी शिकायत सीधे प्रशासन तक पहुँचा सकें। कमिश्नर ने साफ कर दिया कि शिकायतों पर न केवल त्वरित संज्ञान लिया जाएगा, बल्कि दोषी पाए जाने वाले स्कूलों के विरुद्ध विधिसम्मत कड़ी कानूनी कार्रवाई और मान्यता रद्द करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
अब स्कूल नहीं, कमेटी तय करेगी ड्रेस और किताबों के रेट :
निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए आयुक्त ने एक क्रांतिकारी सुझाव दिया है। उन्होंने जिला पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में एक विशेष समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जो छात्रों के यूनिफॉर्म और पुस्तकों के लिए तर्कसंगत और व्यवहारिक दरें (Standard Rates) निर्धारित करेगी। इससे मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता आएगी और बाजार में उपलब्ध सामग्री की कीमतों और स्कूलों द्वारा थोपी जा रही कीमतों के बीच के अंतर को खत्म किया जा सकेगा। आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने अंत में अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इस सख्त रुख के बाद अब प्रमंडल के निजी स्कूलों में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।
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