तनाव छोड़िए, विज्ञान से नाता जोड़िए: स्वस्थ रहने के लिए BRABU में गूंजा 'एकजुटता' का मंत्र

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न्यूज डेस्क।मुजफ्फरपुर 
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग और विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र के संयुक्त सहयोग से एक दिवसीय उच्चस्तरीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। "Together for Health, Stand with Science" (स्वास्थ्य के लिए एकजुट हों, विज्ञान के साथ खड़े हों) के थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आधुनिक जीवनशैली में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर पूर्णतः स्वस्थ रहने का मार्ग प्रशस्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रानी ने की, जिन्होंने समाज के सर्वांगीण विकास के लिए स्वास्थ्य को प्राथमिक आधार बताया।

मानसिक और सामाजिक संतुलन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी :

संगोष्ठी की मुख्य वक्ता डॉ. अंकिता सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक संतुलन ही व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का आधार है। वहीं, डॉ. कुसुम कुमारी ने सामाजिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाते हुए कहा कि मजबूत पारिवारिक संबंध और सामुदायिक सहभागिता एक स्वस्थ समाज की नींव रखते हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक व्यक्ति मानसिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ नहीं होगा, तब तक शारीरिक स्वास्थ्य का लक्ष्य अधूरा रहेगा।


आध्यात्मिक शांति और जीवन संतुलन पर जोर :

कार्यक्रम में आध्यात्मिक स्वास्थ्य के आयामों को जोड़ते हुए डॉ. विदिशा मिश्रा ने ध्यान, योग और आत्म-चिंतन के महत्व को प्रतिपादित किया। उन्होंने बताया कि सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से ही जीवन में वांछित संतुलन हासिल किया जा सकता है। यह सत्र प्रतिभागियों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा, जिसमें आंतरिक शांति के जरिए रोगों से लड़ने की शक्ति विकसित करने की बात कही गई।

शारीरिक स्वास्थ्य और 'प्लेनेटरी डाइट' की उपयोगिता :

शारीरिक स्वास्थ्य के सत्र में डॉ. अंजली चन्द्रा ने संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को रोगों से बचाव का अचूक मंत्र बताया। उन्होंने 'टाइप्स ऑफ फूड' के साथ-साथ 'प्लेनेटरी डाइट' (Planetary Diet) जैसे वैश्विक मानकों पर विस्तार से चर्चा की, जो न केवल मनुष्य बल्कि पर्यावरण के लिए भी हितकारी है। डॉ. चन्द्रा ने स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के वैज्ञानिक तरीकों से छात्रों को अवगत कराया।
 
नई पुस्तक 'इंटीग्रेटिव न्यूट्रिशन' का विमोचन :

इस संगोष्ठी का सबसे विशेष आकर्षण डॉ. अंजली चन्द्रा द्वारा संपादित पुस्तक “Integrative Nutrition: Science, Culture and Sustainability for Healthy Societies” का विमोचन रहा। विशेषज्ञों ने इस पुस्तक को स्वास्थ्य विज्ञान, संस्कृति और स्थिरता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया, जो आने वाले समय में शोधार्थियों और आम जनता के लिए मार्गदर्शक साबित होगी।

वैज्ञानिक सोच और सामूहिक संकल्प : 

मुख्य व्याख्यान (Keynote Address) प्रस्तुत करते हुए डॉ. रेनू कुमारी ने आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान के साथ खड़े होने की अपील की। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. श्वेता प्रियदर्शिनी ने किया। संगोष्ठी के अंत में डॉ. संगीता रानी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में निरंतर सकारात्मक संदेश प्रसारित करता रहेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षकों, छात्रों और स्वास्थ्य कर्मियों ने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का सामूहिक संकल्प लिया।