पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए 'मध्यस्थता' सबसे प्रभावी विकल्प: न्यायमूर्ति 

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न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर

पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता एक गोपनीय और खर्च रहित विकल्प है, जो अदालती कार्यवाही से बाहर विवादों को सुलझाने का एक सशक्त माध्यम है। यह बातें मुख्य अतिथि विशेष न्यायाधीश (SC/ST) अजय कुमार मल्ल ने प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। संचालन डॉ. एच. एन. भारद्वाज, अतिथियों का स्वागत नेत्र विशेषज्ञ सुधांशु कुमार और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एन. के. मिश्रा एवं शोभा रानी मिश्रा ने किया। मौके पर डॉ. राजेश्वर ठाकुर, डॉ. अनुराधा, डॉ. रामगोपाल जैन, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. पल्लवी सिन्हा, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. कंचन, डॉ. आरोही कुमार तथा प्राधिकार के अमित कुमार, रवि, संजीव, कल्याणी और कपूर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

मध्यस्थता से समय और पैसे की बचत
विशिष्ट अतिथि न्यायाधीश (एक्साइज) मिथिलेश कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि पारिवारिक विवादों में तीसरा पक्ष मध्यस्थ बनकर सुलह कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है, और सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें कोई भी निर्णय किसी पक्ष पर थोपा नहीं जाता।

कानूनी सहायता और मध्यस्थता ड्राइव-2
प्राधिकार सचिव जयश्री कुमारी ने सभी से सहयोग की अपील करते हुए 'मध्यस्थता ड्राइव-2' के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के माध्यम से लंबी मुकदमेबाजी से बचा जा सकता है, जो भारत में कानूनी सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है। मॉनिटरिंग एवं मेंटरिंग सदस्य व अपर लोक अभियोजक डॉ. संगीता शाही ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के गठन और कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत योजना और कानूनी सहायता प्रणाली के बारे में भी विस्तार से बताया।