रजत रश्मियों का उत्सव: मदर टेरेसा विद्यापीठ के 26 गौरवशाली वर्ष, मेधा और संस्कृति के संगम से निखरा मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर
शिक्षा की लौ जब निष्ठा के साथ जलती है, तो वह एक पीढ़ी नहीं बल्कि पूरे समाज को आलोकित करती है। मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान 'मदर टेरेसा विद्यापीठ' की 26 वर्षों की यात्रा आज इसी गौरवपूर्ण मुकाम पर खड़ी नजर आई। मणिका और मिठनपुरा शाखाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'वार्षिकोत्सव' केवल एक समारोह नहीं, बल्कि मेधा, संस्कार और कलात्मक अभिव्यक्ति का एक भव्य कुंभ बन गया। हवाओं में गूंजते बच्चों के ठहाके और अभिभावकों की गर्वभरी निगाहों के बीच विद्यालय ने अपनी ढाई दशक से अधिक की उपलब्धियों को पूरे शहर के सामने गर्व से प्रदर्शित किया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शंखनाद :
समारोह का आगाज अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार प्रो. महेंद्र मधुकर, प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. एन. पी. रॉय, मणिका मुखिया अरविंद कुमार, विद्यालय के दूरदर्शी निदेशक सतीश कुमार झा और प्राचार्या विनीता कुमारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. फुलगेन पूर्वे ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बोचहां विधायक बेबी कुमारी ने अपनी उपस्थिति से समारोह की गरिमा बढ़ाई।
मदर टेरेसा विद्यापीठ जैसे संस्थान वर्तमान की जरूरत : प्राे.मधुकर
समारोह को संबोधित करते हुए प्रख्यात साहित्यकार प्रो. महेंद्र मधुकर ने कहा कि मदर टेरेसा विद्यापीठ आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत 'इनोवेटिव आइडियाज' यानी अभिनव विचारों के साथ बच्चों को गढ़ रहा है। वहीं, डॉ. एन. पी. रॉय ने संस्थान के अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे उच्च स्तरीय और प्रेरणादायक आयोजन ही बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाते हैं।
ओवरऑल डेवलपमेंट पर ध्यान देता है संस्थान : डॉ पूर्वे
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. फुलगेन पूर्वे ने एक मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने कहा कि यह संस्थान अंकों की अंधी दौड़ के बजाय बच्चों के 'ओवरऑल डेवलपमेंट' (सर्वांगीण विकास) पर ध्यान देता है, जो इसे दूसरों से अलग बनाता है। शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों का यह त्रिवेणी संगम मुजफ्फरपुर के लिए एक मिसाल है।
निदेशक का संकल्प: "लक्ष्य केवल शिक्षा नहीं, उन्नति है"
इस भावुक और गौरवपूर्ण अवसर पर विद्यालय के निदेशक सतीश कुमार झा ने कहा कि 26 वर्षों का यह सफर भरोसे और मेहनत की कहानी है। हमारा लक्ष्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों की सर्वांगीण उन्नति सुनिश्चित करना है ताकि वे समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

नन्हें कलाकारों ने प्रस्तुतियों से बांधा समां :
कला के रंगों में डूबा पंडाल, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा परिसर
मंच पर जब नन्हे कलाकारों ने कदम रखे, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए छात्रों ने न केवल अपनी कलात्मक प्रतिभा दिखाई, बल्कि नाटकों के माध्यम से सामाजिक संदेश भी दिए। शास्त्रीय नृत्य से लेकर आधुनिक धुनों तक, हर प्रस्तुति में 'मदर टेरेसा' की अनुशासन और उत्कृष्टता की छाप दिखी। पूरे वर्ष शैक्षणिक और अन्य गतिविधियों में अव्वल रहने वाले सितारों को जब मुख्य अतिथियों ने पुरस्कृत किया, तो उनकी चमक देखते ही बन रही थी।
राष्ट्रगान से हुआ समारोह का समापन : आभार और राष्ट्रगान के साथ विदाई
समारोह के समापन पर विद्यालय की पीजीटी हिंदी, श्रीमती आभा कुमारी ने अतिथियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रभक्ति का नया संचार कर दिया। 26 वर्षों की यह 'सिल्वर जर्नी' आज मदर टेरेसा विद्यापीठ के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ गई।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रख्यात साहित्यकार प्रो. महेंद्र मधुकर ने कहा कि मदर टेरेसा विद्यापीठ आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत 'इनोवेटिव आइडियाज' यानी अभिनव विचारों के साथ बच्चों को गढ़ रहा है। वहीं, डॉ. एन. पी. रॉय ने संस्थान के अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे उच्च स्तरीय और प्रेरणादायक आयोजन ही बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाते हैं।







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